भगवान को पाने का मार्ग प्रेम और समर्पण: गिरिराज जी शास्त्री

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जयपुर। श्री पुष्टिमार्गीय वैष्णव मंडल एवं श्री वल्लभ पुष्टिमार्गीय मंदिर प्रबंध समिति के तत्वावधान में अधिकमास के अवसर पर सूरजपोल स्थित श्री गोवर्धननाथ जी मंदिर में आयोजित 11 दिवसीय मथुराधीश महोत्सव के पांचवें दिन गुरुवार को श्रद्धालु भक्ति और आस्था में सराबोर नजर आए। महोत्सव के तहत श्रीमद्भागवत एकादश एवं मूल श्लोकों के परायण, 56 भोग महोत्सव और आकर्षक झांकियों का आयोजन किया गया।

व्यासपीठ से भागवत मर्मज्ञ गिरिराज जी शास्त्री ने श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए कहा कि ईश्वर बाहर की दुनिया में नहीं, बल्कि हर व्यक्ति के भीतर विद्यमान हैं। उन्होंने कहा कि भगवान को पाने का मार्ग अहंकार त्याग, समर्पण, प्रेम और सच्ची भक्ति से होकर गुजरता है। कलयुग में नामजप, ध्यान और निस्वार्थ प्रेम ही ईश्वर प्राप्ति का सरल माध्यम है।

कथा में विदुर और मैत्रेय ऋषि संवाद, सृष्टि रचना और भगवान की लीलाओं का भावपूर्ण वर्णन किया गया। गिरिराज जी शास्त्री ने वर्तमान समय में विवाह समारोहों में बढ़ते दिखावे और भोजन की बर्बादी पर भी चिंता जताते हुए सादगीपूर्ण आयोजन का संदेश दिया। महोत्सव में मुख्य यजमान बांगड़ परिवार ने श्रीमद्भागवत की पूजा-अर्चना कर आरती उतारी। इस दौरान नारायण लाल अग्रवाल, ओमप्रकाश मांधना, संजय बांगड़, भरत मालपानी, प्रमोद कोटेवाला सहित अनेक श्रद्धालु उपस्थित रहे।

मंडल अध्यक्ष गोविन्द मालपानी ने बताया कि महोत्सव के तहत प्रतिदिन विभिन्न मनोरथों और झांकियों का आयोजन किया जा रहा है। गुरुवार को कैरी मनोरथ और यमुना जी में नौका विहार की आकर्षक झांकी श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र रही। आगामी दिनों में कमल तलाई, खस महल, फूलों की सांझी, गौचारण और अष्ट सखी द्वार सहित विभिन्न मनोरथों की झांकियां सजाई जाएंगी। श्रद्धालु प्रतिदिन शाम 7 बजे से रात 9 बजे तक झांकियों के दर्शन कर सकेंगे।

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