जयपुर। संत बाबा उमाकांत महाराज ने सत्संग में कहा कि सच्चे संत इस धरती के सरताज होते हैं और उनमें नसीब बदलने की शक्ति होती है। उन्होंने कहा कि संत जिस व्यक्ति को नामदान देते हैं, उसकी आत्मा से जुड़ जाते हैं और यह संबंध जीवन के अंत तक बना रहता है।
उन्होंने कहा कि संत ऊपर से भी जुड़े रहते हैं और उस आदि से जुड़े होते हैं, जहां से शुरुआत हुई है। व्यक्ति की मृत्यु के बाद सांसारिक लोग कुछ समय तक उसे याद करते हैं, लेकिन धीरे-धीरे भूल जाते हैं। इसके बावजूद गुरु का अपने शिष्य से आध्यात्मिक संबंध बना रहता है।
बाबा उमाकांत ने कहा कि संत शिष्य के जीवन में आने वाली अनहोनी को टाल सकते हैं। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि दुर्घटना, पेड़ से गिरने, रेल दुर्घटना या किसी अन्य कारण से होने वाली संभावित मृत्यु को संत अपने शिष्य को कुछ समय के लिए रोककर या किसी कार्य में लगा कर टाल सकते हैं। उन्होंने कहा कि हर कार्य का एक समय होता है और संत उस समय को टालने की शक्ति रखते हैं।
उन्होंने कहा कि जैसे किसी व्यक्ति की फांसी निर्धारित समय पर होनी हो और किसी कारण से उस समय फांसी टल जाए तो तत्काल उसकी जान बच जाती है, उसी प्रकार संत संभावित अनहोनी को टाल सकते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि आयु पूरी होने के बाद भी यदि कोई व्यक्ति कुछ समय की मोहलत चाहता है तो संत उसकी आयु बढ़ाकर उसे कुछ समय और दे सकते हैं।



















