जयपुर। स्वामीनारायण अक्षरधाम संस्था के मंदिरों में हर्षोल्लास के साथ ‘वचनामृत भाष्य’ लेखन के उपलक्ष में ऐतिहासिक उत्सव मनाया गया। महंत स्वामी महाराज के दिव्य संकल्प अनुसार इस पवित्र दिन पर इस अनुपम कार्य का शुभारंभ हुआ।
जयपुर वैशाली नगर, चित्रकूट मंदिर में सुबह विशेष पूजन और शाम को भव्य पालकी यात्रा का आयोजन किया ग़या। इस अवसर पर दिव्य कार्यक्रमों में प्रातः काल विशेष पूजन व आशीर्वाद कार्यक्रम हुआ। सुबह श्रृंगार आरती के तुरंत बाद संस्था के वरिष्ठ संत पूज्य आनंदस्वरूपदास स्वामी एवं कोठारी स्वामी के वरद हस्तों से ‘वचनामृत ग्रंथ’ ( भगवान स्वामीनारायण के उपदेश का ग्रंथ) का विधिवत एवं वैदिक पूजन किया ग़या इसके बाद आनंदस्वरूपदास स्वामी नें उपस्थित भक्तों को वचनामृत की महिमा के बारे में बताया और शास्त्रपठन की आवश्यकता समझाई।
सायं काल भव्य पालकी यात्रा व विशेष सभा का आयोजन किया गया। संध्या आरती के ठीक बाद मंदिर प्रांगण में ‘वचनामृत ग्रंथ’ की एक भव्य एवं दिव्य पालकी यात्रा निकाली गई। इस यात्रा में आनंदस्वरूपदास स्वामी स्वयं जुड़ें और पालकी के साथ मंदिर की परिक्रमा की। कई श्रद्धालु अपने घरों में प्रतिष्ठित वचनामृत ग्रंथ को मांगलिक वस्त्रों (लाल, पीले, केसरी) में पोथी की तरह सजाकर इस यात्रा में शामिल हुए, पालकी यात्रा के समापन पर एक विशेष सत्संग सभा का आयोजन किया ग़या। जिसमें आनंदस्वरूप स्वामी के दिव्य आशीर्वचन प्राप्त हुए ।
इस पावन अवसर पर सारंगपुर (गुजरात) में स्वयं गुरुहरि महंत स्वामी महाराज भी पूरे कार्यक्रम में उपस्थित रहे, जिससे इस उत्सव की दिव्यता और अधिक बढ़ गई।



















