अकीदत-अमन और भाईचारे के साए में निकले 350 ताजिए, कर्बला में हुए सुपुर्द-ए-खाक

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जयपुर। इस्लाम धर्म के पैगम्बर हजरत मोहम्मद साहब के नवासे हजरत इमाम हुसैन की शहादत की याद में शुक्रवार को राजधानी जयपुर में योमे आशूरा पूरे अकीदत, गम, अमन और धार्मिक श्रद्धा के साथ मनाया गया। शहर भर से करीब 350 छोटे-बड़े ताजियों के जुलूस निकले। जिनमें हजारों अकीदतमंद शामिल हुए। ढोल-ताशों की मातमी धुनों, “या हुसैन”, “या हसन” और “या अली” के नारों के बीच निकले जुलूसों ने पूरे शहर को गमगीन माहौल में डुबो दिया। शुक्रवार देर रात सभी ताजियों को रामगढ़ मोड़ स्थित कर्बला में धार्मिक परंपरा के अनुसार सुपुर्द-ए-खाक किया गया।

शहर के विभिन्न मोहल्लों से शुक्रवार को दोपहर बाद ताजियों का निकलना शुरू हुआ। सभी ताजिए बड़ी चौपड़ पहुंचे, जहां से हवामहल बाजार, चांदी की टकसाल, सुभाष चौक, जोरावर सिंह गेट और रामगढ़ मोड़ होते हुए कर्बला रवाना हुए। जुलूस के साथ विभिन्न अंजुमनों ने नौहाख्वानी और मातम किया।

कई स्थानों पर युवाओं ने हजरत इमाम हुसैन की शहादत की याद में छुरियों से मातम कर अपनी अकीदत का इजहार किया, वहीं पट्टेबाजों ने तलवार, बरछी और मुगदर से हैरतअंगेज करतब दिखाकर शहीदाने कर्बला को सलामी दी। वहीं जिन-जिन मार्गों से ताजिए गुजरे, वहां बड़ी संख्या में लोग दर्शन के लिए उमड़ पड़े। शहर के विभिन्न हिस्सों में लोगों ने श्रद्धा और सम्मान के साथ ताजियों का स्वागत किया।

फूल बरसाकर किया स्वागत, दिखी गंगा-जमुनी तहजीब

हिजरी कैलेंडर के अनुसार जुम्मे के दिन हजरत इमाम हुसैन की शहादत को याद करते हुए सलाम पढ़ा गया और अहलेबैत की मोहब्बत का जिक्र किया गया। अकीदतमंदों ने रोजे खोले। शहर के कई स्थानों पर हिंदू संगठनों ने ताजियों पर पुष्प वर्षा कर स्वागत किया। पूरे आयोजन के दौरान साम्प्रदायिक सौहार्द और भाईचारे की मिसाल देखने को मिली।

इन ताजियों ने खींचा लोगों का ध्यान

चीनी की बुर्ज, बाबू का टीबा, पचरंग पट्टी ईदगाह, हसनपुरा, मोहल्ला मावतान, गुलजार मस्जिद, चांदपोल का तवायफों का ताजिया, मौला कुरेशियों का ताजिया, पन्नीगरान, नीलगरान, नालबंदान, हांडीपुरा, सिरकीगरों का ताजिया, बड़ वालों की मस्जिद का ताजिया, जालूपुरा, रेहमानियों का ताजिया, कुर्मान याजदानी चौक, मछली वाला ताजिया, लुहारों का खुर्रा पहलवानों का ताजिया और उमरान मछली वाला ताजिया विशेष आकर्षण का केंद्र रहे। इसके अलावा जयपुर के शाही परिवार के सोने और चांदी का ताजिया भी लोगों के आकर्षण का केंद्र रहे।

ताजिया निर्माता सलीम ने बताया कि एक ताजिया तैयार करने में डेढ़ से दो लाख रुपए तक खर्च आता है और इसे बनाने में करीब दो माह का समय लगता है। उनका कहना है कि जयपुर के ताजिए देशभर में प्रसिद्ध हैं और अकीदतमंद इन्हें अपनी मन्नतों से जोड़कर देखते हैं।

रातभर चली मजलिसें, नौहाख्वानी से गूंजा शहर

योमे आशूरा से एक दिन पहले ‘कत्ल की रात’ पर गुरुवार देर रात तक शहर भर के इमामबाड़ों और धार्मिक स्थलों पर मजलिसों का आयोजन हुआ। नौहाख्वानी के माध्यम से शहीद-ए-कर्बला को खिराज-ए-अकीदत पेश की गई। “इमाम हुसैन जिंदाबाद” के नारों से पूरा माहौल गूंज उठा। इसके बाद ताजिए अपने-अपने मुकाम से बड़ी चौपड़ की ओर रवाना हुए।

तीन हजार पुलिसकर्मी रहे तैनात, ड्रोन से हुई निगरानी

मुहर्रम के आयोजनों को शांतिपूर्ण और व्यवस्थित ढंग से संपन्न कराने के लिए पुलिस और जिला प्रशासन ने व्यापक सुरक्षा व्यवस्था की। पूरे शहर में करीब तीन हजार पुलिसकर्मियों और अधिकारियों को तैनात किया गया। संवेदनशील क्षेत्रों में अतिरिक्त पुलिस बल के साथ सादा वर्दी में इंटेलिजेंस कर्मी भी लगाए गए। क्विक रिस्पॉन्स टीम (क्यूआरटी) और इमरजेंसी रिस्पॉन्स टीम (ईआरटी) को भी सक्रिय रखा गया।

इसके अलावा अभय कमांड सेंटर, शहरभर में लगे सीसीटीवी कैमरों और ड्रोन कैमरों के जरिए पूरे आयोजन की निगरानी की गई। पुलिस की साइबर सेल सोशल मीडिया पर लगातार नजर रखती रही और अफवाह फैलाने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की चेतावनी दी गई।

अतिरिक्त पुलिस कमिश्नर (कानून-व्यवस्था) राजीव पचार ने बताया कि सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए गए थे। वहीं डीसीपी नॉर्थ करण शर्मा ने संवेदनशील क्षेत्रों का दौरा कर व्यवस्थाओं का जायजा लिया। पुलिस कमिश्नर सचिन मित्तल कंट्रोल रूम और फील्ड स्तर से लगातार मॉनिटरिंग करते रहे।

ट्रैफिक डायवर्जन और पार्किंग पर रहा प्रतिबंध

यातायात पुलिस उपायुक्त योगेश गोयल ने बताया कि जुलुस के मद्देनजर परकोटा क्षेत्र में व्यापक ट्रैफिक डायवर्जन लागू किया गया। संजय सर्किल, अजमेरी गेट, न्यू गेट, सांगानेरी गेट, घाट गेट, गलता गेट और रामगढ़ मोड़ से परकोटे में वाहनों का प्रवेश प्रतिबंधित रहा। वीकेआई रोड नंबर-14, कालवाड़ पुलिया, सिरसी पुलिया, 200 फीट अजमेर रोड, न्यू सांगानेर मोड़, गोपालपुरा मोड़, ट्रांसपोर्ट नगर, धोबीघाट, गलता गेट और आमेर तिराहा सहित प्रमुख मार्गों से भारी वाहनों के प्रवेश पर भी रोक लगाई गई।

चौड़ा रास्ता, बड़ी चौपड़, बापू बाजार, जौहरी बाजार, हवामहल बाजार, सुभाष चौक, रामगंज बाजार, घाट गेट बाजार, चांदपोल बाजार, छोटी चौपड़, त्रिपोलिया बाजार, गणगौरी बाजार, इंदिरा बाजार, किशनपोल बाजार, एमआई रोड और एमडी रोड सहित कई प्रमुख बाजारों में पार्किंग पूरी तरह प्रतिबंधित रही।

वहीं प्रशासन ने केवल लाइसेंसधारी ताजियों को ही जुलूस निकालने की अनुमति दी। सुरक्षा कारणों से 17 ताजियों के लाइसेंस निरस्त किए गए थे। जुलूस मार्ग पर बिजली, पेयजल और अन्य आवश्यक व्यवस्थाएं भी पहले से सुनिश्चित की गई थीं।

जगह-जगह लगी छबील, पिलाया गया शर्बत- गंगा-जमुनी तहजीब के बीच जुलूस मार्ग पर जगह-जगह सामाजिक संस्थाओं, स्वयंसेवकों एवं स्थानीय लोगों की ओर से पानी और दूध की छबीलें लगाई गईं। तपिश और उमस के बीच जुलूस में शामिल अकीदतमंदों और आम राहगीरों को ठंडा शर्बत व पानी पिलाकर पुण्य कमाया गया।

देशभक्ति और आस्था का संगम

जुलूस में शामिल कई मुस्लिम युवा हाथों में सम्मान के साथ तिरंगा लेकर चलते नजर आए। इस बार जुलूस में एक विशाल ताजिये के साथ दर्जनों छोटे ताजिये, अलम और इस्लामी परचम आकर्षण का मुख्य केन्द्र रहे। बच्चे भी हाथों में हुसैनी परचम लहराते हुए श्रद्धा और आस्था के साथ जुलूस में शामिल हुए।

जंजीरी मातम कर किया शहादत को याद

ताजियों के भ्रमण के दौरान शिया समुदाय के युवकों ने वर्षों पुरानी परंपरा का निर्वहन करते हुए छुरियों और कमा का (जंजीरी) मातम किया। युवकों ने स्वयं को लहूलुहान कर कर्बला की दर्दनाक घटना और इमाम हुसैन व उनके परिवार पर आए मसायब (मुसीबतों) को याद किया। इसके अलावा विभिन्न स्थानों पर मजलिसों का आयोजन भी हुआ, जिनमें उलेमाओं ने इमाम हुसैन की शहादत और उनके हक-इंसाफ के संदेश पर प्रकाश डाला।

राजधानी में मुहर्रम के सभी धार्मिक कार्यक्रम पुलिस, प्रशासन और समाज के सहयोग से शांतिपूर्ण, व्यवस्थित और सौहार्दपूर्ण वातावरण में संपन्न हुए। पूरे आयोजन के दौरान जयपुर ने एक बार फिर गंगा-जमुनी तहजीब और आपसी भाईचारे की मिसाल पेश की।

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