जयपुर। श्रीमद् भागवत गीता कथा के प्रथम दिवस का आयोजन श्रद्धा और उत्साह के साथ सम्पन्न हुआ। कार्यक्रम का शुभारंभ आदरणीय कथा वाचक ब्रह्माकुमारी भारती दीदी, एग्रीकल्चर साइंटिस्ट रामगोपाल, पीस पैलेस सेवाकेंद्र संचालिका हेमा दीदी, कविता बहन एवं अजमेर से पधारे ओम प्रकाश भाई द्वारा दीप प्रज्वलन कर किया गया। कार्यक्रम के प्रारंभ और समापन पर आरती भी की गई।
कथा के दौरान भारती दीदी ने गीता के सार को सरल शब्दों में समझाते हुए कहा कि गीता का उपदेश उस समय दिया गया था, जब कौरव और पांडवों के बीच महायुद्ध चल रहा था और भगवान श्रीकृष्ण ने अर्जुन को धर्म और कर्म का मार्ग दिखाया। उन्होंने सवाल उठाया कि आज भी लोग गीता क्यों सुनते हैं? इसका उत्तर देते हुए उन्होंने बताया कि वर्तमान समय में भी मनुष्य के भीतर अच्छे और बुरे विचारों तथा संस्कारों के बीच निरंतर युद्ध चल रहा है।
उन्होंने कहा कि जीवन में आने वाली समस्याओं रूपी युद्ध में विजय प्राप्त करने के लिए सच्चे गीता ज्ञान की आवश्यकता है। आज के कौरव रूपी वातावरण में सच्चे पांडवों की जरूरत है। सच्चा पांडव बनने के लिए केवल भगवान को मानना ही नहीं, बल्कि उनके बताए मार्ग पर चलना भी जरूरी है। गीता को केवल सुनने के बजाय जीवन में उतारने से ही श्रेष्ठ समाज का निर्माण संभव है।
कार्यक्रम में करीब 200 महिलाओं ने भाग लिया और आध्यात्मिक वातावरण का अनुभव किया। अंत में सभी श्रद्धालुओं को प्रसाद वितरित किया गया।



















