इंजन-चेचिस और नंबर प्लेट बदलने वाला शातिर गिरफ्तार

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जयपुर। जयपुर में वाहन चोरी और फर्जीवाड़े के एक बड़े मामले का खुलासा करते हुए जालूपुरा थाना पुलिस ने दिल्ली से चोरी की गई स्कॉर्पियो को बरामद कर लिया है। पुलिस ने गाड़ी के इंजन, चेचिस और नंबर प्लेट बदलकर उसका अवैध उपयोग करने वाले शातिर गिरोह के सदस्य विक्रम जांगिड़ को गिरफ्तार किया है। पुलिस अब पूरे नेटवर्क की गहनता से जांच में जुटी हुई है।

पुलिस के अनुसार गिरफ्तार आरोपी विक्रम जांगिड़ मूल रूप से जयपुर ग्रामीण क्षेत्र के नाथावाला का रहने वाला है और वर्तमान में वैशाली नगर में किराए के मकान में रह रहा था। आरोपी के कब्जे से हरियाणा नंबर की चोरी की स्कॉर्पियो बरामद की गई है, जिसे दिल्ली से चोरी करने के बाद फर्जी दस्तावेजों के आधार पर चलाया जा रहा था।

ट्रैफिक जांच से हुआ पूरे मामले का खुलासा

मामले का खुलासा उस समय हुआ जब ट्रैफिक पुलिस ने लापरवाही से वाहन चलाने के मामले में स्कॉर्पियो को रोका। पुलिस द्वारा दस्तावेजों की जांच के दौरान गाड़ी पर लगा हरियाणा नंबर संदिग्ध पाया गया। जब दस्तावेजों का सत्यापन किया गया तो पता चला कि यह स्कॉर्पियो दिल्ली से चोरी की गई थी।

इसके बाद ट्रैफिक पुलिस ने मामले की सूचना जालूपुरा थाना पुलिस को दी। मौके पर पहुंची पुलिस ने जब गाड़ी के चेचिस नंबर का मिलान किया तो वह भी किसी अन्य वाहन से मेल खाता पाया गया। विस्तृत जांच के बाद पुलिस ने आरोपी को वाहन सहित हिरासत में ले लिया।

फर्जी नंबर प्लेट और बदले चेचिस से चल रहा था खेल

पुलिस जांच में सामने आया है कि आरोपी और उसके साथी चोरी की गई गाड़ियों की पहचान छिपाने के लिए अन्य रजिस्टर्ड वाहनों की नंबर प्लेट का इस्तेमाल करते थे। इसके अलावा इंजन और चेचिस नंबर भी बदलकर गाड़ियों को सड़कों पर चलाया जाता था ताकि किसी को शक न हो।

शिकायतकर्ता ने भी पुलिस को बताया कि उसकी गाड़ी के नंबर का दुरुपयोग किया जा रहा था। जिसके बाद पूरे मामले की गंभीरता से जांच शुरू की गई।

गिरोह के बड़े नेटवर्क की आशंका

पुलिस को आशंका है कि यह मामला किसी एक आरोपी तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके पीछे एक संगठित वाहन चोरी गिरोह सक्रिय है, जिसके तार बड़े शहरों से जुड़े हो सकते हैं। शुरुआती जांच में यह भी सामने आया है कि चोरी की गाड़ियों को काटकर उनके पुर्जे अलग-अलग वाहनों में री-असेंबल कर बेचा जा रहा है।

बरामद स्कॉर्पियो में लगे पुर्जे भी अलग-अलग कंपनियों के पाए गए हैं, जिससे यह स्पष्ट होता है कि वाहन को कई हिस्सों में जोड़कर तैयार किया गया था।

दलाल और कबाड़ी नेटवर्क की तलाश जारी

पुलिस का मानना है कि पूरे देश से चोरी की गई गाड़ियों को सस्ते दामों का झांसा देकर बेचा जा रहा है। बाद में इन वाहनों को काटकर कबाड़ियों को बेच दिया जाता है या उनके पार्ट्स अलग-अलग वाहनों में इस्तेमाल किए जाते हैं।

जांच में यह भी सामने आया है कि इस पूरे रैकेट में वाहन चोरी करने वाले, फर्जी दस्तावेज तैयार करने वाले दलाल और कबाड़ी शामिल हो सकते हैं। पुलिस अब इस सप्लाई नेटवर्क की गहराई से पड़ताल कर रही है।

आगे और गिरफ्तारियों की संभावना

पुलिस अधिकारियों के अनुसार शुरुआती गिरफ्तारी केवल एक कड़ी है और आने वाले दिनों में इस वाहन चोरी सिंडिकेट से जुड़े अन्य लोगों की गिरफ्तारी संभव है। फिलहाल आरोपी से गहन पूछताछ की जा रही है ताकि पूरे गिरोह का पर्दाफाश किया जा सके।

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