17 मई से शुरू होगा पुरुषोत्तम मास: साधना और उपासना का बनेगा विशेष संयोग

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Purushottam Maas will begin on May 17.
Purushottam Maas will begin on May 17.

जयपुर। सनातन परंपरा में समय चक्र का प्रत्येक चरण विशेष आध्यात्मिक महत्व रखता है। इसी क्रम में 17 मई से 15 जून तक पुरुषोत्तम मास (अधिक मास) का पावन कालखंड शुरू होगा। लगभग तीन वर्ष बाद बनने जा रहा यह विशेष संयोग श्रद्धालुओं और साधकों के लिए आध्यात्मिक उन्नति का श्रेष्ठ अवसर माना जा रहा है।

पंडित बनवारी लाल शर्मा ने बताया कि अधिक मास में विवाह, गृह प्रवेश और अन्य मांगलिक कार्य नहीं किए जाते, लेकिन यह समय जप, तप, दान-पुण्य, ध्यान और भगवान विष्णु की उपासना के लिए अत्यंत फलदायी माना गया है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस अवधि में किए गए व्रत, स्नान, दान और साधना का कई गुना अधिक पुण्य फल प्राप्त होता है।

उन्होंने बताया कि इस बार पुरुषोत्तम मास की विशेषता और भी बढ़ जाती है, क्योंकि इसमें ज्येष्ठ मास का द्वित्व स्वरूप देखने को मिलेगा। यानी एक ही मास के दो चरण बनेंगे। इस कारण दो संक्रांतियां, दो पूर्णिमा और दो अमावस्या का दुर्लभ संयोग बनेगा, जो धार्मिक दृष्टि से अत्यंत प्रभावशाली माना जा रहा है।

पंडित शर्मा के अनुसार इस अधिक मास में दो गुरु पुष्य योग भी बन रहे हैं, जबकि सामान्यतः किसी एक मास में यह योग एक ही बार आता है। मई के अंतिम सप्ताह और जून माह में बनने वाले ये शुभ योग साधना, मंत्र सिद्धि और आध्यात्मिक अनुष्ठानों के लिए विशेष ऊर्जा प्रदान करेंगे। उन्होंने कहा कि मंत्रों की सूक्ष्म ध्वनियों को यंत्रों में रूपांतरित कर सिद्धि प्राप्त करने के लिए यह समय अत्यंत प्रभावशाली माना गया है।

उन्होंने बताया कि वैदिक पंचांग के अनुसार सौर वर्ष 365 दिन और चंद्र वर्ष लगभग 354 दिन का होता है। दोनों के बीच प्रतिवर्ष लगभग 11 दिनों का अंतर उत्पन्न होता है, जो करीब 32 माह 16 दिन में एक अतिरिक्त महीने के बराबर हो जाता है। इसी संतुलन को बनाए रखने के लिए अधिक मास जोड़ा जाता है।

शास्त्रों में अधिक मास को पुरुषोत्तम मास कहे जाने के पीछे भी विशेष कथा वर्णित है। श्रीमद्भागवत और नारद पुराण के अनुसार जब इस अतिरिक्त मास को कोई अधिपति नहीं मिला तो यह भगवान विष्णु की शरण में पहुंचा। तब भगवान विष्णु ने इसे अपने नाम “पुरुषोत्तम” की उपाधि देकर स्वयं इसका स्वामी बनने का वरदान दिया। तभी से यह मास अत्यंत पवित्र और पूजनीय माना जाता है।

पुरुषोत्तम मास के दौरान देशभर के मंदिरों, आश्रमों और धार्मिक स्थलों पर विशेष पूजा-अर्चना, कथा, सत्संग और ध्यान साधना कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।

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