जयपुर। भाजपा की राष्ट्रीय सचिव डॉ. अलका गुर्जर ने नारी शक्ति वंदन अधिनियम को लेकर विपक्ष के रुख पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि इससे स्पष्ट हो गया है कि विपक्ष के लिए ‘महिला सशक्तिकरण’ केवल भाषणों तक सीमित है। दशकों तक ‘महिला आरक्षण बिल’ की बात करने वाले दल, जब उसे वास्तविकता में बदलने का समय आया, तो सदन में हंगामा कर उसके पारित होने में बाधा बने। उन्होंने कहा कि देश में नारी शक्ति को सशक्त होते देख विपक्ष असहज हो गया और जिम्मेदारी से बचने के लिए सदन से बाहर चला गया।
भाजपा की राष्ट्रीय सचिव डॉ. अलका गुर्जर ने कहा कि विपक्ष को महिलाओं के वोट तो चाहिए, लेकिन संसद में उनकी भागीदारी स्वीकार नहीं है। ‘पहले परिवार, फिर अन्य’ की सोच रखने वाले ये दल नहीं चाहते कि देश की बेटियां निर्णय लेने वाली मुख्यधारा तक पहुंचें।
उन्होंने कहा कि देश की मातृशक्ति सब देख रही है और विपक्ष का वास्तविक चेहरा पहचान चुकी है। आने वाले समय में लोकतांत्रिक प्रक्रिया के माध्यम से इसका जवाब मिलेगा। उन्होंने कहा कि ‘महिला हितैषी’ होने का दावा करने वाले दलों को नारी शक्ति वंदन अधिनियम के तहत 33 प्रतिशत आरक्षण से लोकतंत्र खतरे में नजर आता है, जबकि वास्तविकता यह है कि उन्हें महिला आरक्षण से नहीं, बल्कि इसका श्रेय वर्तमान सरकार को मिलने से आपत्ति है।
भाजपा की राष्ट्रीय सचिव डॉ. अलका गुर्जर ने कहा कि एक ओर ये दल महिला सम्मेलनों का आयोजन करते हैं, वहीं दूसरी ओर संसद में महिला हितों से जुड़े विधेयकों का विरोध करते हैं। यह विपक्ष का दोहरा चरित्र सबके सामने उजागर हो रहा है। जो दल महिलाओं के सशक्तिकरण के नारे देते हैं, वही उन्हें आगे बढ़ने के अवसर देने से पीछे हटते हैं।
नारी शक्ति वंदन अधिनियम के मुद्दे पर विपक्ष की वास्तविकता देश के सामने आ चुकी है। विपक्ष को भय है कि यदि गांव-गरीब और सामान्य परिवारों की महिलाएं संसद तक पहुंचेंगी, तो परिवारवाद की राजनीति कमजोर होगी। इसीलिए वे महिला आरक्षण का विरोध कर रहे हैं।
उन्होंने कहा कि देश की महिलाएं अब जागरूक हैं और वे इस प्रकार के विरोधाभासी रवैये को भली-भांति समझती हैं। भविष्य में इसका प्रभाव लोकतांत्रिक निर्णयों में अवश्य दिखाई देगा।




















